शास्त्रोक्त विधि
मंत्र और धार्मिक कर्मकांड में संस्कृत का प्रयोग, संवाद में सहज हिंदी।
परंपरागत ज्ञान, दीर्घ अनुभव और प्रत्येक परिवार के प्रति व्यक्तिगत दृष्टिकोण।
पंडित बाल कृष्ण शास्त्री ने अपने बड़े भाई से ज्योतिष और पारंपरिक पुरोहित कर्म की शिक्षा प्राप्त की, जो गुजरात में पंडिताई करते थे। उन्होंने किसी औपचारिक गुजरात संस्थान में ज्योतिष की पढ़ाई नहीं की—उनका ज्ञान पारिवारिक गुरु-शिष्य परंपरा, स्वाध्याय और दीर्घ अभ्यास से विकसित हुआ है।
लगभग वर्ष 2000 से ज्योतिष का अध्ययन और अभ्यास करते हुए उन्होंने 2003 से विधिवत पंडिताई सेवाएँ आरंभ कीं। 2005 से वे दुर्गा माता मंदिर, सर्वे चौक, देहरादून से जुड़े हैं और वर्तमान में मंदिर के मुख्य पुजारी हैं।
पूजा की विधि के साथ परिवार की परिस्थिति, परंपरा और संकल्प को समझना भी उतना ही आवश्यक है।
बड़े भाई से परंपरागत ज्योतिष और धार्मिक विधियों का ज्ञान प्राप्त किया।
परिवारों के लिए पूजा, संस्कार, हवन और धार्मिक कर्मकांड करना आरंभ किया।
सर्वे चौक, देहरादून स्थित मंदिर में नियमित धार्मिक सेवा।
मंदिर सेवा के साथ घर, विवाह स्थल, कार्यालय और अन्य स्थानों पर कर्मकांड।
मंत्र और धार्मिक कर्मकांड में संस्कृत का प्रयोग, संवाद में सहज हिंदी।
प्रत्येक अनुष्ठान परिवार की परंपरा, स्थान और आवश्यकता के अनुसार समझा जाता है।
ज्योतिष में कोई अवास्तविक गारंटी नहीं; परिस्थिति के अनुसार जिम्मेदार परामर्श।
प्राथमिक सेवा क्षेत्र देहरादून और उत्तराखंड है। मंदिर, घर, विवाह स्थल, कार्यालय, व्यवसायिक प्रतिष्ठान और अन्य उपयुक्त स्थानों पर पूजा की जा सकती है। अन्य शहरों की सेवा तिथि, यात्रा, स्थान और उपलब्धता की पूर्व चर्चा के अनुसार होती है।
आवश्यकता पड़ने पर लोक भवन से जुड़े शिव मंदिर तथा विशेष धार्मिक अवसरों पर भी सेवा दी जाती है। किसी सरकारी पद या समर्थन का दावा नहीं किया जाता।
पहले सेवा समझें, फिर तिथि और व्यवस्था तय करें।
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